पंचकेदार यात्रा पर गए रोहतक के ज्वेलर ने लगाए मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप, टैक्सी यूनियन व पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल !
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रिपोर्ट – अरुण शर्मा
उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का एक और मामला सामने आया है। रोहतक के विकास नगर निवासी एवं ज्वेलर हेमंत ने पंचकेदार यात्रा के दौरान स्थानीय टैक्सी यूनियन से जुड़े लोगों और पुलिस पर मारपीट, उत्पीड़न तथा अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। हेमंत का कहना है कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया है और अब उन्हें भविष्य में उत्तराखंड जाने से भी डर लगने लगा है।
हेमंत के अनुसार, वह 15 मई को रोहतक से पंचकेदार यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान 20 मई को चमोली क्षेत्र में उनकी मुलाकात दिल्ली, मध्य प्रदेश और वाराणसी से आए कुछ यात्रियों से हुई, जिन्होंने तुंगनाथ-चोपटा तक जाने के लिए उनसे लिफ्ट मांगी। मानवीय आधार पर उन्होंने यात्रियों को अपनी कार में बैठा लिया और मंडल की ओर रवाना हो गए।
हेमंत का आरोप है कि मंडल क्षेत्र के पास कुछ लोगों ने बाइक लगाकर उनकी गाड़ी को रोक लिया। ये लोग स्वयं को टैक्सी यूनियन से जुड़ा बता रहे थे। उन्होंने आपत्ति जताई कि निजी वाहन में यात्रियों को आगे नहीं ले जाया जा सकता। हेमंत का कहना है कि इसी दौरान उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई।
घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस चौकी में शिकायत की, लेकिन वहां उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें गोपेश्वर भेज दिया गया। हेमंत का आरोप है कि गोपेश्वर में थाना प्रभारी ने उनके साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया। उन्हें लगभग एक घंटे तक तेज धूप में खड़ा रखा गया और गाड़ी के सभी दस्तावेज सही पाए जाने के बावजूद उनका चालान काट दिया गया।
हेमंत ने आरोप लगाया कि स्थानीय टैक्सी यूनियन और पुलिस के बीच मिलीभगत के कारण बाहरी राज्यों के वाहन चालकों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि हरियाणा नंबर की गाड़ी होने के कारण उन्हें विशेष रूप से परेशान किया गया।
उन्होंने बताया कि थाने में उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया मानो वे कोई अपराधी हों। उनके साथ मौजूद यात्रियों ने भी पुलिस को बताया कि उन्होंने केवल लिफ्ट मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस उन्हें व्यावसायिक रूप से सवारी ढोने वाला चालक साबित करने का प्रयास करती रही।
30 मई को वापस लौटे हेमंत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का उन पर मानसिक रूप से गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं पर आने वाले लोगों की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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