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एम डब्ल्यू बी द्वारा मीडियाकर्मियों को आपात स्थितियों मे दी जाने वाली आर्थिक सहायता पांच लाख की, सी एम की प्रस्तावना सराहनीय कार्य ; चंद्र शेखर धरणी

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चंडीगढ़

मीडिया वैल बिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी ने हरियाणा के बजट 2026/2027 में हरियाणा के मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा “हरियाणा मीडिया पर्सनेल वेलफेयर फंड एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम’ के अंतर्गत मीडियाकर्मियों को आपात स्थितियों में दी जाने वाली आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा को 2.50 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किए जाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से आपदा के समय में पत्रकार साथियों के लिए बढ़ाई गई राशि उनके जोखिम को कम करेगी। एम डब्ल्यू बी के अध्यक्ष चन्द्र शेखर धरणी ने कहा कि जल्दी हो एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि मंडल हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलकर उनका आभार व्यक्त करेंगे। धरणी ने कहा कि एम डब्ल्यू बी गठन करोना काल में हुआ था। तब अब तक तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी मीडिया कर्मियों के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को बढ़ाई जाने की मांग के लिए ज्ञापन दिया गया था। यही नही मंत्री अनिल विज, उस वक्त के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर, तत्कालीन हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, मंत्री विपुल गोयल, मंत्री कृष्ण लाल पवार, कृष्ण बेदी, श्रुति चौधरी, रणबीर गंगवा, सहित अन्य मंत्रियों को भी ज्ञापन देने की मुहिम चलाई हुई है।

एमडब्ल्यूबी के प्रयासों से पहले भी 2 बड़ी मांगे हुई पूरी

एमडब्ल्यूबी अध्यक्ष चंद्रशेखर धनी ने कहा कि इससे पहले पत्रकारों की पेंशन 10000 से बढ़कर 15000 करवाने के लिए उनके संगठन ने कड़े प्रयास किए थे जिसकी बदलते मनोहर लाल ने पत्रकारों की पेंशन को 15000 किया था जिसको लेकर उनके संगठन द्वारा मुख्यमंत्री आवास पर तत्कालीन सीएम मनोहर लाल का धन्यवाद भी किया गया था। यही नहीं पत्रकारों के विरुद्ध मामला दर्ज होने पर उनको दी जाने वाली सुविधाओं को बंद होने की नोटिफिकेशन को रद्द करवाने में भी एमडब्ल्यूबी बड़ी भूमिका अदा की जिसके फल स्वरुप यह नोटिफिकेशन भी रद्द हुई थी।
धरनी ने बताया कि हाल ही में उनके संगठन द्वारा मुख्यमंत्री नायब सैनी से उनके चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ज्ञापन सौंप कर आज मुख्यमंत्री द्वारा बढ़ाई गई आर्थिक राशि में बढ़ोतरी करने की मांग की थी।
धरणी ने सी एम के संज्ञान में डाला कि उनके मीडिया सेकेट्री प्रवीण अ व डी जी आई पी आर से भी संस्था अनुरोध कर चुकी है।
सौंपे गए मांग पत्र में मांगों में ,पेंशन सुधार संबंधी मांगें
,एमडब्ल्यूबीए ने सेवानिवृत्ति उपरांत पत्रकारों के लिए न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान करने की प्रमुख मांग की है। वर्तमान व्यवस्था में पेंशन संबंधी नियम जटिल व कठोर हैं, इसलिए इन्हें सरल, पारदर्शी एवं व्यवहारिक बनाने का आग्रह किया गया है, ताकि कोई योग्य पत्रकार वंचित न रहे। विशेष रूप से 5 वर्ष की अनिवार्य एक्रीडिटेशन (मान्यता) की शर्त को समाप्त करने से डिजिटल व स्वतंत्र पत्रकार लाभान्वित होंगे।न्यूनतम 15 वर्ष की सक्रिय पत्रकारिता सेवा पूर्ण करने वाले पत्रकारों को पेंशन का पूर्ण अधिकार प्रदान करने व पेंशन हेतु न्यूनतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित करने की अपील है। ये सुधार पत्रकारों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करेंगे, खासकर जोखिम भरी पत्रकारिता के बाद सेवाकालीन जीवन को सुगम बनाएंगे।
संगठन ने कहा कि डिजिटल युग में मान्यता प्राप्त न होने वाले सैकड़ों पत्रकार इन बदलावों से सशक्त होंगे, जो प्रदेश की पत्रकारिता को मजबूत आधार देंगे।
मांग पत्र में सोशल मीडिया नीति का सरलीकरण सोशल मीडिया पॉलिसी को सरल एवं समावेशी बनाने की मांग उठाई गई है, जिससे अधिकाधिक पत्रकार इसका लाभ प्राप्त कर सकें। वर्तमान नीतियां जटिल होने से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय पत्रकार अक्सर बाहर रह जाते हैं, जबकि सोशल मीडिया आज पत्रकारिता का अभिन्न अंग है। एमडब्ल्यूबीए ने जोर देकर कहा कि सरलीकरण से युवा पत्रकारों को मान्यता व सुविधाएं मिलेंगी। पत्रकारों के परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिले।पत्रकारों एवं उनके परिवारों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने हेतु शीघ्र अधिसूचना जारी करने की अपील की गई है। राजस्थान मॉडल की तर्ज पर 10 लाख रुपये तक का वार्षिक कैशलेस इलाज इनडोर व आउटडोर दोनों के लिए उपलब्ध हो। संगठन ने उल्लेख किया कि पत्रकार अक्सर जोखिम भरी कवरेज में घायल होते हैं, इसलिए यह सुविधा उनके लिए वरदान सिद्ध होगी। पारिवारिक पेंशन का प्रावधान किया जाए
पेंशनधारी पत्रकार की मृत्यु की स्थिति में उनकी पत्नी अथवा आश्रित परिवारजनों को पारिवारिक पेंशन प्रदान करने का प्रावधान सरकारी कर्मचारियों की भांति लागू करने की मांग है। इससे परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी व पत्रकार का समर्पण व्यर्थ न जाए। एमडब्ल्यूबीए ने कहा कि यह कदम पत्रकार बिरादरी के सम्मान को बढ़ाएगा।सरकारी बसों में पत्रकारों के लिए सीटें आरक्षित करने व निजी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा परिवहन विभाग की सभी श्रेणियों की बसों—डीलक्स, वीडियो कोच, एसी आदि—में पत्रकारों के लिए न्यूनतम दो सीटें आरक्षित करने व निजी बसों में पुलिस कर्मचारियों की तर्ज पर निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की अपील की गई है। ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों को खबरों की कवरेज हेतु यह सुविधा क्रांतिकारी सिद्ध होगी, जो उनकी गतिशीलता व कार्यक्षमता को बढ़ाएगी।
मांग पत्र में कहा गया है कि एमडब्ल्यूबीए के मुख्यालय हेतु आवासीय सुविधा एवं शिक्षा-रोजगार में आरक्षण मिले।पंचकूला में मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन के मुख्यालय हेतु रियायती दरों पर सरकारी भूखंड आवंटित करने की मांग है। इससे संगठन पत्रकार कल्याण के लिए और सक्रिय भूमिका निभा सकेगा। पत्रकारों के लिए विशेष आवासीय योजनाएं प्रारंभ करने अथवा रियायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने की अपील की गई है, जो आर्थिक बोझ को कम करेगा।पत्रकारों के बच्चों को विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सरकारी नौकरियों में 3% आरक्षण प्रदान करने की महत्वपूर्ण मांग भी शामिल है। इससे भावी पीढ़ी सशक्त बनेगी व पत्रकारिता पेशे का सामाजिक सम्मान बढ़ेगा। चंद्रशेखर धरणी ने कहा कि एमडब्ल्यूबीए ने कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट जैसे मामलों में पहले ही मदद की है। नायब सिंह सैनी सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा है, जो हरियाणा पत्रकारिता को नई दिशा देगी। पत्रकार समुदाय इन सुधारों का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

सोमेश शर्मा (राज्य ब्यूरो चीफ) हरियाणा

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