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एक धातु की कील ने आमेर के किले में बिछा दी लाशें !

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             जयपुर आमेर में बीती रात हुए हादसे के बाद अभी तक हाहाकार मचा हुआ है। एसएमएस अस्पताल में घायलों के परिजनों के साथ ही मुर्दाघर के बाहर मृतकों के परिजनों की भीड़ है। किसी का जवान बेटा चला गया तो किसी का कमाने वाला इकलौता सदस्य। यहां तक कि जयपुर की खूबसूरती निहारने आए अन्य राज्य या जिलों के पर्यटक भी मौत के आगोश में चले गए। उनके शवों को भी एसएमएस अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है। अब तक ग्यारह लोगों की मौत हो चुकी है। हांलाकि मौत का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार चार से पांच लोगों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई हैं।

किसे पता था जहां बचने के लिए छुप रहे हैं वहीं इंतजार कर रही है मोैत स्थानीय निवासियों ने बताया कि आमेर में वाॅच टाॅवर के नजदीक शाम छह बजे तक बेहद ज्यादा भीड़ थी। फिर जैसे- जैसे बारिश शुरु हुई तो भीड़ कम होने लगी लोग नीचे आने लगे। उपर और नीचे आने जाने के लिए बस पांच फीट का ही संकरा सा रास्ता है। उस पर अचानक भीड़ बढ़ने लग गई। स्थानीय निवासी सुल्तान अहमद ने बताया कि जब बारिश शुरु हुई तो बारिश के साथ बिजली कडकने के धमाके होने लगे। काॅलोनी के कुछ बच्चे भी उपर गए थे जो जल्दी ही नीचे लौट आए। उन्होनें बताया कि उपर कुछ लोग हैं जो बारिश से बचने के लिए वाॅच टाॅवर के आसपास जमा हो गए हैं। इतनी ही देर में भयंकर आवाज हुई और उसके बाद तो चीख पुकार मच गई। बारिश से बचने के लिए जिस वाॅच टाॅवर की शरण ली वहीं पर मौत ने आ घेरा।

तांबे और कांसे की बड़ी कील ने खींच ली बिजली, साठ फीट से भी ज्यादा नीचे पहुंची तरंगे सिविल डिफेंस की टीम को लीड करने वाले महेन्द्र सेवड़ा ने बताया कि वाॅच टाॅवर खुद ही करीब पच्चीस फीट उंचा है। उस पर लगी तांबे और कांसे की कील ने ऐसे बिजली खींची कि लाशें बिछ गई। हम जब उपर पहुंचे थे उस समय करीब साठ फीट से भी गहने तक बिजली की तरंगे पहुंच जाने के कारण गड्डा हो गया था। बहुत से शवों को तो इस हालत में उतार कि लगता है सदमे से मौत हुई है। जो लोग जीवित थे बोलने की हालत तक में नहीं थे।

परिजन मानने को ही तैयार नहीं कि बच्चे आमेर चले गए घाटगेट क्षेत्र में रहने वाले कई युवा इस हादसे का शिकार हो गए। पुलिस ने जब कुछ मृतकों और घायलों के परिजनों को फोन किया तो उनके परिवार के सदस्यों का कहना था कि उन्हें तो पता ही नहीं था कि बेटा आमेर गया है। अगर ऐसा पता होता तो बेटे को कभी बाहर ही नहीं निकलने देते। राजपार्क निवासी मृतक के परिजनों ने बताया कि बेटा कहकर गया था कि कुछ देर में वापस आ रहा हूं। यह नहीं पता था कि वह आमेर चला गया है। अब वह कभी नहीं आएगा।

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