कवि कुँवरपाल शर्मा जन्मोत्सव पर हुए विराट कवि सम्मेलन में बही काव्यधारा !
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(सम्भल के व्यंग्य कवि अतुल कुमार शर्मा ने साधे अपने व्यंग्य-बाण)
हाथरस
विमल साहित्य मंच के तत्वावधान में कवि कुंँवर पाल शर्मा के जन्मदिन पर विराट कवि सम्मेलन, सीपीएस डिग्री कॉलेज में भद्रपाल सिंह चौहान की अध्यक्षता में देवेंद्र दीक्षित शूल एवं डॉक्टर उपेंद्र झा के संयुक्त संचालन में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि धीरज पाण्डेय , विशिष्ट अतिथि जयपाल सिंह चौहान व कृष्ण कुमार राघव द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया गया। संयोजक प्रमोद विषधर, प्रभात शर्मा, राजेंद्र शर्मा, श्रेयश शर्मा, वैष्णव शर्मा ने सभी अतिथियों का शॉल व प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया गया। मथुरा से पधारी रेणु उपाध्याय ने शारदे की आराधना के साथ कविता का गायन किया गया। कार्यक्रम संयोजक प्रमोद विषधर ने पढ़ा कि हम तुम्हारी कसम वो तोड़ दें, हम इधर से उधर यदि कदम मोड़ दें। शेरनी की तरह चीख उसने कहा, साजना हम तेरी खोपड़ी फोड़ दें।। सम्भल से पधारे व्यंग्यकवि अतुल कुमार शर्मा ने हास्य-व्यंग्य सुनाकर तालियांँ बटोरीं। उन्होंने सुनाया- मिट चुकी अपने-पराए की पहचान अब तो, क्योंकि लोग साँपों को भी अपनी आस्तीन में पालते हैं।।
कवि मोहन मोही, जयकुमार जय, महेश मंजुल, गीतकार अभय सिंह अभय, डॉ उपेंद्र झा, प्रमोद विषधर, अविनाश चंद्र मिश्र, व्यंगकार अतुल कुमार शर्मा, देवेंद्र दीक्षित शूल, कृष्ण मुरारीलाल मानव ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस मौके पर डॉ शरीफ अली, पंडित ओमपाल शर्मा, कुमुदकांत गर्ग, यतेंद्र शर्मा उर्फ पप्पू शर्मा, संतोष शर्मा, रामवीर सिंह यादव, हनीश लेखपाल, राम किशोर शर्मा आदि लोग मौजूद रहे।
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