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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हरियाणा में जश्न और सियासत तेज, छात्रों ने मनाई जीत, विपक्ष बोला- ‘देर आए, दुरुस्त आए’ !

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रिपोर्ट – हर्षुल शर्मा, हरियाणा

     चंडीगढ़। NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों के आंदोलन के बीच शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हरियाणा में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। कई जिलों में छात्रों और विपक्षी दलों ने इसे युवाओं की जीत बताते हुए जश्न मनाया, जबकि कांग्रेस और इनेलो ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि देश के युवाओं के हित सर्वोपरि हैं और सरकार उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।

      हिसार के लघु सचिवालय में पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे युवा प्रदीप भानखड़ ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने ढोल की थाप पर समर्थकों के साथ नृत्य कर खुशी जताई। इस दौरान मौजूद लोगों ने भी मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई दी। प्रदीप भानखड़ ने कहा कि यह किसी व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं की जीत है, जिन्होंने अपने अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के लिए आवाज बुलंद की।

     उधर, करनाल में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री हों, शिक्षामंत्री हों या सरकार का कोई भी प्रतिनिधि, यदि युवाओं के हित में किसी भी प्रकार का त्याग करना पड़े तो सरकार पीछे नहीं हटेगी। यदि किसी परीक्षा में कोई कठिनाई आई है तो उसका समाधान निकाला जाएगा। हमारा उद्देश्य युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना है।”

     इधर, कुरुक्षेत्र में कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा और मनदीप चट्ठा के नेतृत्व में विजय मार्च निकाला गया। रेवाड़ी में पूर्व विधायक चिरंजीव राव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर इसे छात्र आंदोलन की जीत बताया। नारनौल में भी कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर जश्न मनाते नजर आए।

     पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार ने बहुत देर से निर्णय लिया। यदि समय रहते कार्रवाई होती तो देशभर के लाखों छात्रों को मानसिक पीड़ा और असमंजस का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर हुआ है। इसलिए पूरे परीक्षा तंत्र में व्यापक सुधार कर पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

      राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज सबसे ताकतवर होती है। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री को छात्रों और उनके अभिभावकों से माफी मांगनी चाहिए तथा आंदोलन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

     इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि पहले किसानों ने सरकार को झुकाया था और अब युवाओं ने भी अपनी ताकत दिखा दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है और संगठित जनआंदोलन के सामने किसी भी सत्ता का अहंकार अधिक समय तक टिक नहीं सकता।

      रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा छात्र आंदोलन की पहली बड़ी जीत है। उन्होंने देशभर के छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह संघर्ष निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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