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हरियाणा के हित सुरक्षित, NCR की सीमा में नहीं होगा कोई बदलाव: नायब सैनी

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···एनसीआर में बने रहेंगे हरियाणा के 14 जिले, ‘नमो सिटी’ विकसित करने की तैयारी

चंडीगढ़, हरशुल शर्मा

      राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमा में फिलहाल किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की। बैठक के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि राज्य का वर्तमान एनसीआर क्षेत्र यथावत रहेगा और हरियाणा के 14 जिले पहले की तरह एनसीआर का हिस्सा बने रहेंगे।

     पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही थी कि एनसीआर के दायरे को पुनर्परिभाषित किया जा सकता है, जिसके चलते हरियाणा के करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे जिले इसके दायरे से बाहर हो सकते थे। हालांकि बैठक में ऐसे किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गई, जिससे इन जिलों के लोगों और उद्योग जगत को बड़ी राहत मिली है।

      मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चार आधुनिक ‘नमो सिटी’ विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि इन शहरों के संभावित स्थानों का चयन अभी नहीं हुआ है। इसके लिए एक विशेष समिति गठित की गई है, जो राज्यों से सुझाव प्राप्त कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि प्लान-2041 को अंतिम रूप देने के लिए बनाई गई उपसमिति 15 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जबकि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की अगली, 43वीं बैठक दिसंबर में प्रस्तावित है।

      बैठक में एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण और परिवहन व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बीएस-6 से नीचे के वाहनों को लेकर नई परिवर्तन योजना तैयार की जा रही है। साथ ही दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस की तर्ज पर करनाल दिशा तथा मानेसर क्षेत्र में क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क के विस्तार पर भी कार्य जारी है। एनसीआर के कोर एरिया से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

महेंद्रगढ़ पर पड़ सकता था सबसे अधिक प्रभाव

     यदि एनसीआर सीमा में बदलाव को मंजूरी मिल जाती तो इसका सबसे अधिक असर महेंद्रगढ़ जिले पर पड़ता, क्योंकि जिले का बड़ा हिस्सा दिल्ली से 100 किलोमीटर की परिधि से बाहर स्थित है। जींद भी सीमा रेखा के निकट होने के कारण व्यापक रूप से प्रभावित होता। इसके अलावा भिवानी और चरखी दादरी के कुछ क्षेत्रों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना थी।

राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर का प्रस्ताव

       हरियाणा सरकार ने एनसीआर में अपने क्षेत्रों का समावेश बनाए रखने के लिए 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर बनाए रखने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल से एनएच-44 पर स्थित करनाल और पानीपत को विशेष राहत मिल सकती है, जबकि भिवानी और चरखी दादरी को भी संबंधित राजमार्गों के माध्यम से आंशिक लाभ मिलने की संभावना है।

पानीपत के उद्योग जगत की अलग राय

      दिलचस्प बात यह है कि पानीपत के कई उद्योगपति लंबे समय से एनसीआर से बाहर किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि एनसीआर में लागू सख्त प्रदूषण नियमों, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत लगने वाले प्रतिबंधों तथा महंगे पीएनजी ईंधन के उपयोग की बाध्यता के कारण उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

मनोहर लाल पहले उठा चुके हैं मुद्दा

     गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मनोहर लाल खट्टर ने करनाल और जींद को एनसीआर में शामिल करवाने को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया था। उस निर्णय के बाद हरियाणा का लगभग 57 प्रतिशत क्षेत्र एनसीआर का हिस्सा बन गया था। हालांकि दिसंबर 2021 में उन्होंने यह भी कहा था कि दिल्ली से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित जिलों को एनसीआर में रखने का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। उनका मत था कि ऐसे जिलों को विकास के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, जबकि उन्हें एनसीआर के नियमों और प्रतिबंधों का पालन अवश्य करना पड़ता है।

      मंगलवार की बैठक के फैसले के बाद फिलहाल एनसीआर के स्वरूप में किसी बदलाव की संभावना टल गई है और हरियाणा के सभी 14 जिले पहले की तरह एनसीआर क्षेत्र का हिस्सा बने रहेंगे।

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