हरियाली के नाम पर लाखों खर्च, फिर भी सूख गए पौधे !
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···नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जांच के लिए कमेटी गठित
फरीदाबाद (हरियाणा)
फरीदाबाद शहर को सुंदर और हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा लगाए गए पौधे अब बदहाली का शिकार होते दिखाई दे रहे हैं। शहर की प्रमुख सड़कों, फ्लाईओवर, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर रखे गए बड़े-बड़े गमलों में लगे अनेक पौधे सूख चुके हैं। कई स्थानों पर गमले टूटे पड़े हैं, जबकि कहीं पौधों की देखभाल पूरी तरह नदारद नजर आ रही है। इस स्थिति ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और परियोजना पर खर्च किए गए लाखों रुपये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम फरीदाबाद ने पिछले वर्ष शहर के सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण अभियान के तहत करीब 1500 बड़े गमलों में पौधारोपण कराया था। इस कार्य का ठेका नव्या एंटरप्राइज़ कंपनी को दिया गया था। गमलों को शहर के विभिन्न मार्गों, फ्लाईओवर और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित किया गया था। इस पूरी परियोजना पर लगभग 65 लाख रुपये खर्च किए गए थे। बताया जा रहा है कि इस राशि में गमलों की खरीद, पौधारोपण, सिंचाई व्यवस्था और रखरखाव का खर्च भी शामिल था।
वर्तमान स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में पौधे सूख चुके हैं। कई गमलों में मिट्टी तक सूखी पड़ी है, जिससे स्पष्ट होता है कि लंबे समय से पौधों को पानी नहीं मिला। कुछ स्थानों पर आवारा पशुओं द्वारा पौधों को नुकसान पहुंचाने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआती दिनों में पौधों की देखभाल होती दिखाई दी, लेकिन बाद में रखरखाव पूरी तरह लापरवाही की भेंट चढ़ गया।
मामले को लेकर RTI एक्टिविस्ट अजय सैनी ने नगर निगम से जानकारी मांगते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए, तो फिर पौधों की ऐसी स्थिति कैसे हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्य की गुणवत्ता और रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई है। उनका कहना है कि यदि समय पर निगरानी और उचित देखभाल की जाती, तो इतनी बड़ी संख्या में पौधे सूखते नहीं।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद नगर निगम प्रशासन ने जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी गमलों की गुणवत्ता, पौधों के रखरखाव, भुगतान प्रक्रिया और ठेका आवंटन की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मुद्दा पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि हरियाली और सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि पौधे ही नहीं बच पाए, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
रिपोर्ट – अरुण शर्मा ( मंडल व्यूरो चीफ, फरीदाबाद)
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