हल्दीराम पर फूटा कानून का डंडा: एक्सपायर्ड मिठाई बेचने और सबूत मिटाने पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना ! – Republic Hindustan News

Republic Hindustan News

Latest Online Breaking News

हल्दीराम पर फूटा कानून का डंडा: एक्सपायर्ड मिठाई बेचने और सबूत मिटाने पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना !

😊 Please Share This News 😊

फरीदाबाद

       प्रसिद्ध फूड चेन ‘हल्दीराम मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड’ को एक्सपायर्ड (अतिदेय) मिठाई बेचना और ग्राहक से बदसलूकी करना भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, फरीदाबाद ने कंपनी को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

       यह मामला 21 दिसंबर 2025 का है, जब फरीदाबाद निवासी निमिष अग्रवाल सेक्टर-16 स्थित हल्दीराम के आउटलेट पर मिठाई खरीदने गए थे। शिकायत के अनुसार:
चालाकी से पैकिंग: सेल्सपर्सन ने बिलिंग के बहाने ग्राहक को पहली मंजिल पर भेजा और पीछे से एक्सपायर्ड मिठाई को पैक करने की कोशिश की।
सबूत मिटाने का प्रयास: जब ग्राहक ने मिठाई के असली डिब्बे की मांग की, तो सेल्सपर्सन ने उसे देने से मना कर दिया और दबाव बनाने पर डिब्बे को फाड़ दिया ताकि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट छिपाई जा सके।
बदसलूकी: टोकने पर स्टाफ ने माफी मांगने के बजाय बेहद अभद्र व्यवहार किया और यहाँ तक कह दिया, “आप कौन सा यह स्टोर बंद करा दोगे?”।

9 दिन पुरानी थी मिठाई
जांच में सामने आया कि जो मिठाई ग्राहक को बेची गई, वह 12 दिसंबर 2025 को बनी थी और उसकी अंतिम तिथि 19 दिसंबर 2025 थी। यानी एक्सपायरी डेट निकलने के दो दिन बाद ग्राहक को यह मिठाई थमा दी गई, जो सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ था।

आयोग का कड़ा रुख···

       हल्दीराम की ओर से दलील दी गई कि उनके पास सख्त क्वालिटी कंट्रोल है और वे नियमों का पालन करते हैं। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा एडवोकेट पृथ्वी राज अग्रवाल के माध्यम से पेश किए गए फोटो, वीडियो और फटे हुए डिब्बे के सबूतों के सामने आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया।
उपभोक्ता आयोग (अध्यक्ष अमित अरोड़ा और सदस्य इंदिरा भड़ाना) ने निम्नलिखित आदेश दिए:
₹15,000: जानबूझकर एक्सपायर्ड मिठाई बेचने और डिब्बे से छेड़छाड़ करने के जुर्माने के रूप में।
₹3,300: मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में।
₹2,200: कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में।
आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करे। यह फैसला उन बड़े ब्रांड्स के लिए एक चेतावनी है जो उपभोक्ता के अधिकारों और स्वास्थ्य को हल्के में लेते हैं।

पवन चौहान (जिला क्राइम रिपोर्टर)

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]

लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
error: Content is protected !!