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सड़कों पर मौत बनकर घूम रहा बेसहारा गोवंश, हादसों के बाद भी नहीं जागा निगम !

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···दो साल में कैटल की चपेट में 15 से ज्यादा घायल, करीब पांच लोगों की गई जान; 10 हजार से अधिक बेसहारा गोवंश के सामने निगम की व्यवस्था बेबस

फरीदाबाद, 12 अगस्त

      फरीदाबाद शहर की सड़कों पर खुलेआम घूम रहा बेसहारा गोवंश अब लोगों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। मंगलवार को स्कूटी सवार कारोबारी आशु खत्री की सड़क पर बैठी गाय से टक्कर हो गई। हादसे में उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर नगर निगम की कैटल नियंत्रण व्यवस्था, कार्रवाई और दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

      शहर में सड़क हादसों का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों में बेसहारा गोवंश के कारण हुए हादसों में 15 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, जबकि करीब पांच लोगों की जान जा चुकी है। सड़क पर अचानक सामने आ जाने वाले गाय, सांड और अन्य पशुओं के कारण सबसे ज्यादा जोखिम दोपहिया वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है।

10 हजार से ज्यादा बेसहारा गोवंश, निगम के पास महज नौ वाहन

      नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक फरीदाबाद में 10 हजार से अधिक बेसहारा गोवंश खुले में घूम रहा है। इन्हें पकड़ने के लिए निगम के पास करीब नौ बड़े वाहन और 20 कर्मचारियों का स्टाफ है। निगम के अनुसार रोजाना अलग-अलग इलाकों से करीब पांच से सात पशुओं को पकड़ा जाता है।

     हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि लगातार पशु पकड़े जा रहे हैं तो शहर की सड़कों पर इनकी संख्या कम क्यों नहीं हो रही? कई मामलों में पकड़े गए पशुओं को दोबारा खुले में छोड़ दिए जाने या उनके वापस सड़कों पर पहुंच जाने की बात भी सामने आती रही है।

दो साल में पांच हजार पशु पकड़े, फिर भी सड़कों पर बढ़ता खतरा

     निगम का दावा है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच करीब पांच हजार लावारिस पशुओं को पकड़कर विभिन्न गौशालाओं में भेजा गया। इनमें 2044 पशु श्री गोपाल गोशाला, 1739 गो रक्षा सदन मवई और 578 गो मानव सेवा ट्रस्ट में भेजे गए। इसके अलावा 52 पशु देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल, 43 छांयसा गोशाला और 319 पशु नवादा गौशाला में रखे गए।

     इसके बावजूद शहर की प्रमुख सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में बेसहारा गोवंश का जमावड़ा लगातार दिखाई दे रहा है। ऐसे में निगम के आंकड़ों और जमीन पर दिखाई देने वाली स्थिति के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है।

हादसों की लंबी फेहरिस्त, कब रुकेगा मौत का सिलसिला?

– 12 अगस्त 2026: स्कूटी सवार कारोबारी आशु खत्री की सड़क पर बैठी गाय से टक्कर हुई, मौत।
– 6 अगस्त 2026: सेक्टर-18 ओल्ड रोड पर सड़क पर बैठी गायों से ट्रक टकराया।
– 24 अप्रैल 2026: बाजार जा रही महिला और उनकी दो बेटियां बेसहारा पशुओं की चपेट में आकर घायल हुईं।
– 5 अगस्त 2025: गुरुग्राम मार्ग पर बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से इंजीनियर घायल।
– 6 अगस्त 2025: दयालबाग में बेसहारा गोवंश से बचने की कोशिश कर रही महिला को कार ने टक्कर मार दी।
– 2 अगस्त 2024: भारत कॉलोनी में सांड की टक्कर से प्रॉपर्टी डीलर की मौत।
– 7 अप्रैल 2024: सेक्टर-3 में बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से मां-बेटा घायल।
– 5 अप्रैल 2024: सेक्टर-3 में बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से बुजुर्ग घायल।
– 1 नवंबर 2021: खेड़ी गांव में बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से बुजुर्ग महिला की मौत।
– 13 अगस्त 2017: फरीदपुर-खेड़ी कलां रोड पर बेसहारा गोवंश की चपेट में आने से युवक की मौत।
– 13 अगस्त 2017: फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर सांड की टक्कर से युवक की मौत।
– 20 मई 2017: बड़खल में सांड की टक्कर से सैनिक कॉलोनी निवासी महिला की मौत।

हड़ताल का हवाला, कार्रवाई पर फिर सवाल

     नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी (एमओएच) नीतीश परवाल ने बताया कि निगम कर्मचारियों की चल रही हड़ताल के कारण बेसहारा पशुओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले निगम के पास पशु पकड़ने के लिए केवल दो वाहन थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर नौ हो गई है। इससे शहर के अधिक क्षेत्रों में पहुंचकर पशुओं को पकड़ने में मदद मिलेगी।

दूध निकालो और सड़क पर छोड़ दो, एफआईआर का ऐलान भी बेअसर

     नगर निगम ने कुछ महीने पहले सड़कों पर पशु छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया था। निगम की ओर से कहा गया था कि दूध निकालने के बाद पशुओं को सार्वजनिक सड़कों पर खुला छोड़ने वाले पशुपालकों पर सिर्फ जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, बल्कि एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

     लेकिन अधिकारियों के मुताबिक घोषणा के बावजूद अब तक ऐसे किसी पशुपालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

      यही सबसे बड़ा सवाल है—जब सड़क पर छोड़े गए पशुओं की जिम्मेदारी तय करने और पशुपालकों पर एफआईआर की घोषणा हो चुकी है, तो कार्रवाई जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रही?

फाइल फोटो 

      आशु खत्री की मौत के बाद एक बार फिर शहर के सामने वही सवाल खड़ा है—क्या किसी और परिवार के उजड़ने का इंतजार किया जाएगा या नगर निगम बेसहारा गोवंश की समस्या का स्थायी समाधान करेगा? सड़क पर घूमता हर बेसहारा पशु अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी के लिए सीधा खतरा बन चुका है।

रिपोर्ट– अरुण शर्मा (फरीदाबाद)

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