श्रावण के अंतिम सोमवार पर कल्कि मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़, गूंजेगा ‘हर-हर महादेव !
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···द्वापर युग में ब्रह्मा जी द्वारा स्थापित व महारानी अहिल्याबाई द्वारा 300 वर्ष पूर्व जीर्णोद्धार का साक्षी है ‘हरि-हर’ संगम स्थल; मुरादाबाद, बदायूं व रामपुर से पहुंचेंगे श्रद्धालु व कांवड़िए
···यूपी सरकार के ‘धार्मिक पर्यटन सर्किट’ से जुड़ेगा द्रविड़ शैली का यह अनूठा देवालय, सुरक्षा के लिए ‘नो व्हीकल जोन’ व अस्थायी पार्किंग तैयार
संभल, 23 अगस्त
श्रावण मास के पावन अंतिम सोमवार को लेकर ऐतिहासिक नगरी संभल स्थित 1000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन श्री कल्कि विष्णु मंदिर में भव्य जलाभिषेक की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सावन के समापन अवसर पर इस बार मंदिर में सैकड़ों की तादाद में स्थानीय भक्तों और दूर-दराज से आने वाले कांवड़ियों के जुटने की संभावना है। गंगा घाटों से कांवड़ में पवित्र गंगाजल लेकर पहुंच रहे श्रद्धालुओं के आगमन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है। श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण में वर्णित भगवान विष्णु के दसवें अवतार की इस भावी अवतरण भूमि पर स्थित यह देवालय सावन में ‘हरि’ (विष्णु) और ‘हर’ (शिव) के दिव्य मिलन का केंद्र बन जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संभल को ‘धार्मिक पर्यटन सर्किट’ से जोड़ने की योजना के बीच, प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य व सुगम दर्शन के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
एक रात में ब्रह्मा जी ने की थी स्थापना, द्वार पर आज भी अंकित है अहिल्याबाई का राजचिन्ह
संभल के ऐतिहासिक गजेटियर और प्राचीन संदर्भों में दर्ज इस मंदिर का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के आह्वान पर स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने मात्र एक रात में इस मंदिर का निर्माण कर शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। मध्यकाल में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भक्तों की अटूट आस्था के चलते इस मंदिर का मूल गर्भगृह सदैव सुरक्षित रहा। कालांतर में लगभग 300 वर्ष पूर्व इंदौर की धर्मपरायण महारानी अहिल्याबाई होलकर ने इसका वृहद जीर्णोद्धार कराया था। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर आज भी इंदौर स्टेट का राजचिन्ह पूरी भव्यता के साथ अंकित है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व की गवाही देता है।
उत्तर भारत में द्रविड़ शैली का अनूठा संगम और ‘कृष्ण कूप’ का औषधीय चमत्कार
भौगोलिक रूप से उत्तर भारत में स्थित होने के बावजूद इस मंदिर की वास्तुकला विशुद्ध दक्षिण भारतीय (द्रविड़) शैली में निर्मित है, जो इसे पूरे क्षेत्र में अद्वितीय बनाती है। मंदिर परिसर में स्थित अत्यंत प्राचीन ‘कृष्ण कूप’ पुरातात्विक और धार्मिक दृष्टि से बड़ा केंद्र है। जनश्रुति है कि इस कुएं का जल कभी नहीं सूखता और इसमें प्राकृतिक औषधीय गुण विद्यमान हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से आराधना करने पर कष्टों से मुक्ति मिलती है। सावन के पावन अवसर पर यहाँ विशेष रुद्राभिषेक और आरती का क्रम जारी है।
पर्यटन सर्किट’ से जुड़ रहा प्राचीन मंदिर, एएसआई का संरक्षण अभियान
उत्तर प्रदेश सरकार संभल के ऐतिहासिक स्थलों के कायाकल्प के लिए ‘धार्मिक पर्यटन सर्किट विकास योजना’ पर कार्य कर रही है। संभल में ‘श्री कल्कि धाम’ के विकास के साथ-साथ इस प्राचीन श्री कल्कि विष्णु मंदिर को भी मुख्य पर्यटन सर्किट से जोड़ने की पहल की जा रही है। मंदिर के ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इसके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण की योजना पर ध्यान दिया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध
बृजघाट, कछला घाट व अन्य गंगा तटों से जल लेकर संभल, मुरादाबाद, रामपुर और बदायूं के नजदीकी क्षेत्रों से श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने मंदिर मार्ग पर सुगम आवागमन के लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया है और मंदिर के आसपास के क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ बनाया है। परिसर में पुलिस बल तैनात है। नगर पालिका द्वारा पेयजल, स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राथमिक मेडिकल सहायता और मंदिर से कुछ दूरी पर अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गई है ताकि दर्शनार्थियों को कोई असुविधा न हो।
रिपोर्ट– संजीव गुप्ता
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