सम्भल से आलू निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार, किसानों को क्लस्टर पर ₹10 लाख प्रोत्साहन का लाभ !
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सम्भल ( बहजोई), 22 जुलाई 2026
जनपद सम्भल से आलू निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार, बहजोई में जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल के निर्देशन एवं मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि, उद्यान एवं कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग के अधिकारियों, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के प्रतिनिधियों तथा गुजरात से आए प्रमुख आलू निर्यातकों ने भाग लिया।
उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जनपद में आलू निर्यात की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए इच्छुक किसानों एवं एफपीओ को निर्यात से जोड़ने के लिए यह बैठक आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वय से किसानों को निर्यात संबंधी आवश्यक जानकारी एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी सौरभ बंसल ने बताया कि सम्भल में मुख्य रूप से चिप्सोना, पुखराज, सूर्या एवं ख्याति प्रजाति के आलू का उत्पादन होता है। इन किस्मों की गुणवत्ता के कारण जनपद से निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं।
कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग के निरीक्षक अवनीश कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति-2019 की जानकारी देते हुए बताया कि 50 हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर कुल उत्पादन का कम से कम 30 प्रतिशत निर्यात करने पर 10 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब 50 हेक्टेयर क्षेत्र पूरे ब्लॉक में होने पर भी क्लस्टर बनाया जा सकेगा। साथ ही नए एफपीओ को निर्यातक के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
गुजरात से आए एसआर ग्रुप के विजय सहगल एवं योगेश आर्या तथा मंत्रा के आशीष जैन ने बताया कि उनकी कंपनियां पिछले वर्षों में 70 हजार टन आलू का निर्यात कर चुकी हैं। उन्होंने किसानों और व्यापारियों को जोड़ने के लिए विकसित “पोटैटो बाजार” एप की जानकारी दी तथा कम रसायनों के प्रयोग के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर जोर दिया। निर्यातकों ने बताया कि वे एलआर, लाकर एवं ख्याति प्रजाति के 45 मिमी या उससे अधिक आकार वाले आलू की खरीद के इच्छुक हैं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों एवं एफपीओ को आलू निर्यात की प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि निर्यात बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और सम्भल की कृषि उपज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बनाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जनपद सम्भल में उर्वरकों एवं रसायनों की खपत अन्य जनपदों की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक है, जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वैज्ञानिक एवं संतुलित तरीके से उर्वरकों और रसायनों का उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट– संजीव गुप्ता
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