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एनआईटी जोन में प्रशासनिक अस्थिरता से बढ़ीं समस्याएं, दो वर्षों में चार जॉइंट कमिश्नर बदले !

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 फरीदाबाद

      फरीदाबाद के एनआईटी जोन में पिछले दो वर्षों के दौरान प्रशासनिक अस्थिरता स्पष्ट रूप से सामने आई है। इस अवधि में चार जॉइंट कमिश्नर के तबादले होने से न केवल प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता प्रभावित हुई, बल्कि कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी अधूरी रह गईं।

     इस महत्वपूर्ण पद पर जितेंद्र गर्ग, हितेंद्र शर्मा, दिविजा गठवाल और जितेंद्र जोशी जैसे एचसीएस अधिकारी कार्य कर चुके हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी लंबे समय तक इस पद पर नहीं टिक पाया।

      निगम सूत्रों के अनुसार, एनआईटी जोन का दायरा काफी बड़ा और जटिल है। इसमें एनआईटी फरीदाबाद और बड़खल विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। एनआईटी क्षेत्र में लगभग 210 कॉलोनियां हैं, जबकि बड़खल क्षेत्र में 150 से अधिक कॉलोनियां निगम के अधीन आती हैं। इन क्षेत्रों में जमीन विवाद और अवैध निर्माण के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं।

     विशेष रूप से बड़खल क्षेत्र में अवैध निर्माण से संबंधित 200 से अधिक शिकायतें सीएम विंडो हरियाणा पर लंबित हैं। जॉइंट कमिश्नर को वार्ड स्तर पर 15 लाख रुपये तक के विकास कार्यों को स्वीकृति देने का अधिकार भी होता है, जिससे इस पद की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।

     बताया जाता है कि अत्यधिक कार्यभार और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते अधिकारी यहां ज्यादा समय तक नहीं टिक पाते। सितंबर 2024 में पदभार संभालने वाले जितेंद्र गर्ग ने दयालबाग क्षेत्र में नाले पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें कई दुकानों और स्कूलों को चिन्हित किया गया था। हालांकि, राजनीतिक दखल के चलते यह कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी और फरवरी में उनका तबादला कर दिया गया।

      इसके बाद हितेंद्र शर्मा ने नीलम चौक क्षेत्र में नाले पर हुए अवैध निर्माण की जांच शुरू की, लेकिन उनका भी जल्द ही तबादला हो गया। कुछ समय के लिए यह जिम्मेदारी दिविजा गठवाल को सौंपी गई। जुलाई 2025 में जितेंद्र जोशी ने कार्यभार संभाला, लेकिन 25 मार्च को उन्हें भी स्थानांतरित कर मौलिक शिक्षा निदेशालय में उपनिदेशक बना दिया गया।

     वर्तमान में इस पद पर परमजीत चहल को नियुक्त किया गया है, जिनसे प्रशासनिक स्थिरता और सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

     इसी बीच धनेश अदलखा ने सरकार से अधिकारियों के तबादलों में स्थिरता लाने की मांग की है, ताकि अधिकारी क्षेत्र को बेहतर तरीके से समझकर प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। वहीं, बड़खल निगरानी समिति के पूर्व सदस्य आनंदकांत भाटिया का कहना है कि अवैध निर्माण की समस्या गंभीर है और इसके समाधान के लिए अधिकारियों को पर्याप्त समय दिया जाना आवश्यक है।

फरीदाबाद से मंडल व्यूरो चीफ अरुण शर्मा की रिपोर्ट!

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