अंकिता भंडारी के कातिलों को फांसी देने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन। – Republic Hindustan News

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अंकिता भंडारी के कातिलों को फांसी देने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन।

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     फरीदाबाद, 27 सितम्बर (अरुण शर्मा)। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के कातिलों को फांसी व पीडि़त परिवार को मुआवजा प्रदान देने की मांग को लेकर आज उत्तराखंड जागरूक मंच के बैनर तले उत्तराखंड की विभिन्न संस्थाओं के लोगों ने सेक्टर 12 राजस्थान भवन के सामने एकत्रित होकर प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय के सामने पहुंचे। प्रदर्शन के फौरन बाद देश के प्रधानमंत्री के नाम 7 सूत्री मांगों का ज्ञापन नगराधीश नसीब सिंह को सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में 18 सितंबर को वनतारा रिजॉर्ट में 19 साल की बेटी अंकिता भंडारी जो उस रिजोर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थी को देह व्यापार में धकेलने के लिए उसके मालिक ने मजबूर किया। जब बहादुर बेटी ने इस काम को करने से इंकार कर तो दिया तब उस रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों ने अंकिता भंडारी को मानसिक रूप से प्रताडि़त किया। उसको मारा पीटा गया। अन्त में उसकी निर्मम हत्या करके उसके शव को नहर में फेंक दिया गया। 4 दिन तक पट्टी पटवारी ने कोई सुनवाई नहीं की। क्योंकि पटवारी के साथ कातिल की सांठगांठ थी। जब पट्टी पटवारी की तरफ से टालमटोल की नीति अपनाई जा रही थी। तब लोगों ने इस केस को पुलिस को सौंपने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाया। जब पीडि़त परिवार के सदस्य थाने में गए। उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई इतना ही उन्हें वहां पर बैठने भी नहीं दिया गया। जबकि कातिल के पिता को पुलिस थाने में सम्मान के साथ बिठाकर चाय पिलाई जा रही थी। पीडि़त परिवार के सदस्य उसी थाने के बाहर गुहार लगाकर के खड़े थे। पुलिस प्रशासन की उनकी तरफ देख भी नही रहा था।
कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल के अध्यक्ष नन्दन सिंह कंडाकोटी ने बताया कि जब यह मामला आम जनता के संज्ञान में आया तब उन्होंने पीडि़त परिवार को न्याय देने के लिए हत्यारों को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर जब धरने और प्रदर्शन शुरू किए तब उत्तराखंड की सरकार जागी। सामाजिक कार्यकर्ता और एनजीओ के अध्यक्ष चंदन सिंह अधिकारी ने बताया कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा की सरकार में बेटियों के साथ इस तरह के जघन्य अपराध हो रहे हैं। यह उत्तराखंड को शर्मसार करने वाली हृदय विदारक घटना है। जिसमें एक बेटी जिसके बहुत बड़े अरमान थे उसकी जीवनलीला को समाप्त कर दिया जाता है। फिर भी उत्तराखंड की सरकार अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करती है। अभी भी उत्तराखंड में पट्टी पटवारी को ही इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करने का अधिकार है। उत्तराखंड जागरुक मंच ने देश के प्रधानमंत्री से अंग्रेजों के जमाने के इस कानून को बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के मामले में पुलिस प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। ना की पट्टी पटवारी को। इसके अलावा मांग पत्र में पीडि़त परिवार को 2 करोड का मुआवजा देने, उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करने, उत्तराखंड की शिक्षा को रोजगार प्रदत बनाने, बेरोजगारों को रोजगार देने, जब तक रोजगार नहीं मिलता आदि का ज्ञापन सौंपा गया।
आज की विरोध सभा के मौके पर कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल के अध्यक्ष नन्दन सिंह कंडाकोटी, सामाजिक कार्यकर्ता और एनजीओ के अध्यक्ष चंदन सिंह अधिकारी, डूंगर सिंह नेगी, दिगंबर सिंह खाती, यशपाल सिंह बंगारी, रतन लाल राणा सेक्टर-3, प्रदीप सिंह गुसाई, जगदीश चंद्र पुजारी, इंदर सिंह बिष्ट, भैरव दत्त शर्मा, ठाकुर सिंह कठायत, कुंदन सिंह रावत, भगत राम उनियाल, गोविंद प्रसाद कुकरेती आदि भी उपस्थित रहे।

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