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जितना हम प्रकृति से लेते थे, उतना ही हम प्रकृति को देना भी सीखें- दुष्यंत मिश्रा !

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सम्भल

     वृक्षारोपण महोत्सव के अन्तर्गत पेड़ लगाने की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए, पर्यावरण प्रेमी दुष्यन्त मिश्रा के नेतृत्व में दुर्गा कॉलोनी स्थित कृष्णा मुरारी चिड़िया पार्क में बरगद, बेल, नीम, नींबू, आम आदि के पौधे लगाए गए। तत्पश्चात् एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें एडवोकेट चौधरी अरविन्द सिंह ने कहा कि आज की स्थिति देखकर, भविष्य की स्थिति भयानक नजर आती है। कल्पना कीजिए कि अगर पेड़ वाईफाई सिग्नल देते, तो हम कितने सारे पेड़ लगाते, शायद हम ग्रह को बचाते। बहुत दुख की बात है कि वे केवल ऑक्सीजन का सृजन करते हैं। कितना दुखद है कि हम प्रौद्योगिकी के इतने अभ्यस्त हो गए हैं, कि हम अपने पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों की अनदेखी करते चले जा रहे हैं। न केवल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल प्रकृति को नष्ट कर रहा है, बल्कि यह हमें उससे अलग भी कर रहा है।
एमजीएम महाविद्यालय में कार्यरत भूगोल विभाग के प्रभारी दुष्यन्त मिश्रा ने कहा कि हमारी ग्राम संस्कृति में प्रकृति एवं मनुष्य की स्थिति दाता एवं पाता की रही है, इसका अर्थ है जितना हम प्रकृति से लेते थे, उतना ही हम प्रकृति को देते थे। आज स्थिति पूर्ण रूप से विपरीत हो गई है, हम प्रकृति से लेते चले जा रहे हैं, परंतु प्रकृति को हमारा योगदान शून्य हो चुका है।
भारतीय इतिहास संकलन समिति के जिला विद्वत प्रमुख एवं कवि अतुल कुमार शर्मा ने कहा कि प्राचीन काल से ही मनुष्य ,प्रकृति एवं पशुओं के बीच बड़ी घनिष्ठता रही है। मनुष्य के लिए पशु एवं पेड़-पौधे दोनों ही अनिवार्य थे। जब से मनुष्य ने पशुओं को पालना प्रारंभ किया , तभी से घर के आस-पास एवं खेत खलियान में पशुओं के लिए पेड़ लगाना भी जीवन का महत्वपूर्ण लक्ष्य हो गया। परंतु जैसे ही हम तकनीकी युग में आए, जीवन के कुछ क्षेत्रों में पशु अप्रासंगिक हो गए ,जहां खेत खलियान एवं घरों के आसपास पेड़-पौधे पशुओं के लिए छाया प्रदान करते थे, वही आज खेत खलियान में पेड़ पौधे नुकसान का पर्याय समझे जाने लगे।
चौधरी हरवीर सिंह ने कहा कि आज जिस प्रकार से वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि एवं जलवायु परिवर्तन से प्रकृति में असंतुलन की स्थिति बनती चली जा रही है, इस असंतुलन का एकमात्र उपाय वैश्विक स्तर पर वृक्षारोपण को हम सभी अपनी जीवन शैली में शामिल करना ही होगा। इस अवसर पर समाज के अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट– संजीव गुप्ता

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