फरीदाबाद में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्ती, 834 स्कूलों ने अब तक नहीं भरा फार्म-6
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फरीदाबाद
फरीदाबाद जिले में प्राइवेट स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों के बावजूद मनमानी जारी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले के 1372 प्राइवेट स्कूलों में से 834 स्कूलों ने अब तक फीस बढ़ोतरी से पूर्व अनिवार्य रूप से भरे जाने वाले फार्म-6 को जमा नहीं किया है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले फार्म-6 भरना अनिवार्य होता है। इस फार्म में प्रस्तावित फीस वृद्धि का पूरा विवरण देना होता है, जिसके आधार पर विभाग द्वारा अनुमति प्रदान की जाती है। बिना फार्म-6 भरे फीस बढ़ाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी गलत है।
31 मार्च थी अंतिम तिथि
विभाग द्वारा फार्म-6 भरने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद केवल 538 स्कूलों ने ही समय पर फार्म जमा किया, जबकि बड़ी संख्या में स्कूलों ने नियमों की अनदेखी की है।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अंशु सिंगला ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 भरना सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के लिए अनिवार्य है और इस संबंध में पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो स्कूल आदेशों की अनदेखी करेंगे, उनके खिलाफ निदेशालय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे स्कूलों का एमआईएस पोर्टल बंद किया जा सकता है, जिसके बाद वे न तो नए दाखिले कर पाएंगे और न ही स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे।
अभिभावकों में बढ़ रही चिंता
इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों में भी नाराजगी बढ़ रही है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के महासचिव कैलाश शर्मा ने बताया कि कई स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। उन्होंने कहा कि फार्म-6 की प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए लागू की गई है, ताकि कोई भी स्कूल बिना अनुमति फीस न बढ़ा सके।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस विषय में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की गई हैहै
फरीदाबाद में प्राइवेट स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी एक गंभीर विषय बनता जा रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग की सख्ती और समयबद्ध कार्रवाई ही अभिभावकों को राहत दिला सकती है तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने में मददगार साबित होगी।
हरियाणा से हर्षुल शर्मा की रिपोर्ट!
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